फीफा विश्व कप 2026: ब्राजील के स्टार खिलाड़ी नेमार जूनियर ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से लिया संन्यास
आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से भेजे 47 संदिग्ध मैसेज
कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा आम जनता की शिकायतों और समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए शुरू की गई 'सीधे मुख्यमंत्री' सेवा अब साइबर अपराधियों के निशाने पर है। इस महत्वपूर्ण सेवा के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट के हैक होने से प्रशासनिक गलियारों और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हैकर्स ने अकाउंट पर अवैध कब्जा करने के बाद उसके जरिए कुल 47 अनधिकृत मैसेज भेजे और दो विवादास्पद स्टोरी भी अपलोड कर दीं। इस गंभीर सुरक्षा चूक के खिलाफ विधाननगर साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हैकर्स ने इस वारदात को बड़े ही शातिर तरीके से अंजाम दिया।
जांच में पता चला कि अकाउंट को देर रात हैक किया गया था। शिकायतकर्ता संस्था ने पुलिस को डिजिटल साक्ष्य सौंपते हुए बताया कि साइबर हमले का पहला चरण रात 2:06 बजे से 2:19 बजे के बीच चला, जिसमें कई अनधिकृत मैसेज प्रसारित किए गए। इसके बाद हैकर्स ने सुबह 9:11 बजे से 9:22 बजे के बीच दोबारा अकाउंट में सेंधमारी की और संदेश भेजने का दूसरा दौर शुरू किया। इन दोनों चरणों को मिलाकर कुल 47 डायरेक्ट मैसेज अलग-अलग लोगों और विभागों को भेजे गए। इस हैकिंग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हैकर्स ने मुख्यमंत्री के इस आधिकारिक अकाउंट का उपयोग कर राज्य के अन्य महत्वपूर्ण हैंडल्स को भी संदेश भेजे। जांचकर्ताओं ने पाया कि हैकर्स ने 'एगिए बंगला' के साथ-साथ 'कोलकाता पुलिस' और 'वेस्ट बंगाल पुलिस' जैसे संवेदनशील आधिकारिक अकाउंट्स को भी डायरेक्ट मैसेज भेजे। इस हरकत के पीछे प्रशासन में भ्रम फैलाने या सुरक्षा ढांचे को चुनौती देने की बड़ी साजिश की आशंका जताई जा रही है। हैकर्स ने जिस तरह से इस वारदात को अंजाम दिया, उसने तकनीकी विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है।
बताया जा रहा है कि इस इंस्टाग्राम अकाउंट के संचालन के लिए बेहद कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल तय हैं। नियमों के मुताबिक, इस अकाउंट को केवल तीन अधिकृत डिवाइस—एक सरकारी मोबाइल फोन, एक पूर्व-निर्धारित लैपटॉप और कार्यालय के एक विशेष डेस्कटॉप कंप्यूटर—के जरिए ही लॉग-इन किया जा सकता है। इन डिवाइस के अलावा किसी अन्य सिस्टम से लॉग-इन करना लगभग नामुमकिन था, ऐसे में सुरक्षा घेरा कैसे टूटा, यह जांच का मुख्य विषय बना हुआ है। साइबर हमले की जानकारी मिलते ही आईटी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अकाउंट का पासवर्ड बदला और उसे सुरक्षित किया।
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, टाइम स्टैम्प और स्क्रीनशॉट समेत तमाम डिजिटल साक्ष्यों को अपने कब्जे में ले लिया है। साइबर क्राइम पुलिस अब आईपी एड्रेस और संदिग्ध लिंक को ट्रैक कर रही है ताकि अपराधियों के लोकेशन का पता लगाया जा सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक तकनीकी छेड़छाड़ नहीं, बल्कि राज्य के शीर्ष कार्यालय की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है, इसलिए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बारुईपुर नाबालिग हत्याकांड पर विधायक रत्ना देवनाथ का तीखा बयान, पूर्व सरकार पर साधा निशाना